बारिकियाँ

रग रग को आहिस्ता आहिस्ता पढ़ती हैं, बारिकियाँ चुपके से !
ज़हन को आहिस्ता आहिस्ता झांकती हैं, बारिकियाँ चुपके से !

सोच को आहिस्ता आहिस्ता खोलती हैं, बारिकियाँ चुपके से !
गम्भीरता को आहिस्ता आहिस्ता टटोलती हैं, बारिकियाँ चुपके से !

गहराइयों को आहिस्ता आहिस्ता चूमती हैं, बारिकियाँ चुपके से !
फ़रेब को आहिस्ता आहिस्ता ढूँढती हैं, बारिकियाँ चुपके से !

शब्दों को आहिस्ता आहिस्ता तौलती हैं, बारिकियाँ चुपके से !
ईर्ष्या को आहिस्ता आहिस्ता भाँपती हैं, बारिकियाँ चुपके से !

दर्द को आहिस्ता आहिस्ता पढ़ती हैं, बारिकियाँ चुपके से !
वजह को आहिस्ता आहिस्ता ढूँढती हैं, बारिकियाँ चुपके से…!!!

बारिकियाँ Barikiya Hindi Thoughts Written By Priya Pandey

Barikiya

Rag Rag Ko Aahista Aahista Padhti Hain, Barikiya Chupke Se !
Zahan Ko Aahista Aahista Jhankti Hain, Barikiya Chupke Se !

Soch Ko Aahista Aahista Kholti Hain, Barikiya Chupke Se !
Gambhirta Ko Aahista Aahista Tatolati Hain, Barikiya Chupke Se !

Gehraiyon Ko Aahista Aahista Chumti Hain, Barikiya Chupke Se !
Fareb Ko Aahista Aahista Dhundhati Hain, Barikiya Chupke Se !

Shabdo Ko Aahista Aahista Taulati Hain, Barikiya Chupke Se !
irshya Ko Aahista Aahista Bhapti Hain, Barikiya Chupke Se !

Dard Ko Aahista Aahista Padhti Hain, Barikiya Chupke Se !
Wajah Ko Aahista Aahista Dhundhati Hain, Barikiya Chupke Se…!!!


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