सत्य

मिथ्या के ज़ायक़े चखते रहे, अब सत्य ज़ुबान पर चढ़ता ही नही !
मिथ्या से मिलाप करते रहे, अब सत्य चौखट पर मिलता ही नही !

मिथ्या का चोग़ा ओढ़ते रहे, अब सत्य को दामन मिलता ही नही !
मिथ्या को बहुमत मिलते रहे, अब सत्य को मत मिलता ही नही !

मिथ्या को सागर मिलते रहे, अब सत्य को साहिल मिलता ही नही !
मिथ्या को ज़मीर मिलते रहे, अब सत्य को लिहाज़ मिलता ही नही !

मिथ्या को संस्कार मिलते रहे, अब सत्य को जन्म मिलता ही नही !
मिथ्या को विकल्प मिलते रहे, अब सत्य को प्रमाण मिलता ही नही !

मिथ्या को विचार मिलते रहे, अब सत्य को आकार मिलता ही नही !
मिथ्या के ज़ायक़े चखते रहे, अब सत्य ज़ुबान पर चढ़ता ही नही…!!!

सत्य Satya Hindi Poetry By Priya Pandey

Satya

Mithya Ke Zaike Chakhte Rahe, Ab Satya Zubaan Par Chadhta Hi Nahi !
Mithya Se Milaap Karte Rahe, Ab Satya Chaukhat Par Milta Hi Nahi !

Mithya Ka Choga Odhte Rahe, Ab Satya Ko Daman Milta Hi Nahi !
Mithya Ko Bahumat Milte Rahe, Ab Satya Ko Mat Milta Hi Nahi !

Mithya Ko Sagar Milte Rahe, Ab Satya Ko Sahil Milta Hi Nahi !
Mithya Ko Zameer Milte Rahe, Ab Satya Ko Lihaaz Milta Hi Nahi !

Mithya Ko Sanskar Milte Rahe, Ab Satya Ko Janam Milta Hi Nahi !
Mithya Ko Vikalp Milte Rahe, Ab Satya Ko Praman Milta Hi Nahi !

Mithya Ko Vichar Milte Rahe, Ab Satya Ko Aakar Milta Hi Nahi !
Mithya Ke Zaike Chakhte Rahe, Ab Satya Zubaan Par Chadhta Hi Nahi…!!!


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