लापरवाही की फ़ितरत

लापरवाही की फ़ितरत लिए अक्सर खुद को मिटा रही हूँ !
बेपरवाही की फ़ितरत लिए अक्सर खुद को सता रही हूँ !

लापरवाही की फ़ितरत लिए खुद पर कलंक लगा रही हूँ !
बेपरवाही की फ़ितरत लिए खुद पर क़र्ज़ चढ़ा रही हूँ !

लापरवाही की फ़ितरत लिये मन ही मन में सुलग रही हूँ !
बेपरवाही की फ़ितरत लिए मन ही मन में भुगत रही हूँ !

लापरवाही की फ़ितरत लिए अपनी मनमानी चला रही हूँ !
बेपरवाही की फ़ितरत लिए अपनो की पीड़ा बढ़ा रही हूँ !

लापरवाही की फ़ितरत लिए समझदारी से हाथ छुड़ा रही हूँ !
बेपरवाही की फ़ितरत लिए बर्बादी परवान चढ़ा रही हूँ !

लापरवाही की फ़ितरत लिए कर्तव्यों के उल्लंघन से जूझ रही हूँ !
बेपरवाही की फ़ितरत लिए अब खुद ही खुद से उलझ रही हूँ...!!!

लापरवाही की फ़ितरत Laparwahi Ki Fitrat Hindi Poetry Written By Priya Pandey

Laparwahi Ki Fitrat

Laparwahi Ki Fitrat Liye Aksar Khud Ko Mita Rahi Hu !
Beparwahi Ki Fitrat Liye Aksar Khud Ko Sata Rahi Hu !

Laparwahi Ki Fitrat Liye Khud Par Kalank Laga Rahi Hu !
Beparwahi Ki Fitrat Liye Khud Par Qarz Chadha Rahi Hu !

Laparwahi Ki Fitrat Liye Man Hi Man Mein Sulag Rahi Hu !
Beparwahi Ki Fitrat Liye Man Hi Man Mein Bhugat Rahi Hu !

Laparwahi Ki Fitrat Liye Apni Manmaani Chala Rahi Hu !
Beparwahi Ki Fitrat Liye Apno Ki Peeda Badha Rahi Hu !

Laparwahi Ki Fitrat Liye Samajhdari Se Haath Chhuda Rahi Hu !
Beparwahi Ki Fitrat Liye Barbadi Parwan Chadha Rahi Hu !

Laparwahi Ki Fitrat Liye Kartavyo Ke Ullanghan Se Joojh Rahi Hu ! Beparwahi Ki Fitrat Liye Ab Khud Hi Khud Se Ulajh Rahi Hu...!!!


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