समर्पित तो कर दिया एक रूह ने अपना सब कुछ,

जहां बस स्वार्थ की पुरवाई बहती रही ! 

यह समर्पण देख सबकी रूह भी कापी,

तो वही स्वार्थी पुरवाई लज्जित हो बहती रही !


समर्पण की नादानी कई नादानियाँ करती रही, 

एक रूह से बिन शर्त ही समर्पित होने को कहती रही !


समर्पण का विश्वास जब लौ में जलता रहा,

स्वार्थ का शरीर उसको देख थर थर काँपता रहा !


स्वार्थ तो अपनी पक्की इमारतें बनाते गया,

पर समर्पण उसको ढहने पे मजबूर करता रहा...!!!

समर्पण Samarpan Hindi Poetry Thoughts Written By Priya Pandey Hindi Poem, Poetry, Quotes, काव्य, Hindi Content Writer. हिंदी कहानियां, हिंदी कविताएं, Urdu Shayari, status, बज़्म

Samarpit To Kar Diya Ek Rooh Ne Apna Sab Kuch,

Jaha Bas Svarth Ki Puravai Behati Rahi ! 

Yah Samarpan Dekh Sabki Rooh Bhi Kapi, 

To Wahi Swarthi Puravai Lajjit Ho Behati Rahi ! 


Samarpan Ki Nadani Kai Nadaniya Karti Rahi, 

Ek Rooh Se Bin Shart Hi Samarpit Hone Ko Kahti Rahi ! 


Samarpan Ka Vishwas Jab Lau Mein Jalta Raha,

Swarth Ka Shareer Usko Dekh Thar Thar Kanpta Raha ! 


Swarth To Apni Pakki Imarate Banate Gaya,

Par Samarpan Usko Dhhane Pe Majboor Karata Raha...!!!


Also Read This Poetry : नैनों का दिल से कुछ यूँ है कहना