*** मेरे सकारात्मक संदर्भ में ***

कल्पनायें भी धीरे धीरे वास्तविकता का रूप ले रही है,

वास्तविकता को टटोल कर कल्पनायें भी अब आनंद ले रही है,

कल्पना भी पहले मनुष्य को वास्तविकता की डगर से भटका रही थी,

अब कल्पनायें भी धीरे धीरे वास्तविकता का रूप ले रही है !


पहले कल्पनायें उजागर हो कर वास्तविकताओं को तनिक फीका कर रही थी,

तब वही कई कल्पनायें भी वास्तविकताओं को प्रश्न चिन्हित कर रही थी !


अब मनुष्य की कल्पनाओं के अनुपम भावो से,

वास्तविकता प्रभावित हो रही है

तो वही श्रेष्ठ कल्पनाओं के बीज से ही,

बेहतर वास्तविकताओं की उपज हो रही है !


कल्पनायें भी अब धीरे धीरे वास्तविकता का रूप ले रही है....!!!

कल्पना एवं वास्तविकता Kalpana Evam Vastavikta Hindi Poetry Written By Priya Pandey Hindi Poem, Poetry, Quotes, काव्य, Hindi Content Writer. हिंदी कहानियां, हिंदी कविताएं, Urdu Shayari, status, बज़्म

Kalpanaye Bhi Dheere Dheere Vastavikta Ka Roop Le Rahi Hai,

Vastavikta Ko Tatol Kar Kalpanaye Bhi Ab Anand Le Rahi Hai,

Kalpana Bhi Pehle Manushya Ko Vastavikta Ki Dagar Se Bhatka Rahi Thi,

Ab Kalpanaye Bhi Dheere Dheere Vastavikta Ka Roop Le Rahi Hai ! 


Pehle Kalpanaye Ujagar Ho Kar Vastaviktao Ko Tanik Fika Kar Rahi Thi,

Tab Wahi Kai Kalpanaye Bhi Vastaviktao Ko Prashan Chinhit Kar Rahi Thi ! 


Ab Manushya Ki Kalpanao Ke Anupam Bhavo Se,

Vastavikta Prabhavit Ho Rahi Hai

To Wahi Shreshth Kalpanao Ke Beej Se Hi,

Behtar Vastaviktao Ki Upaj Ho Rahi Hai ! 


Kalpanaye Bhi Ab Dheere Dheere Vastavikta Ka Roop Le Rahi Hai....!!!



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