अच्छी लग ही रही थी वो सावन की बारिश,

की ज़िम्मेदारियों का वो सूखा जो पड़ गया!

कई उज्ज्वल सपनों को मेरा कंधा जो मिल गया!


अब उठाना ही था उस अबोध को छोटे कंधों पर,

छोटी सी ज़िंदगी को महंगा बोझ जो मिल गया!

शरीर को अब ना ही होश है छोटे से ज़ख्मों का,

ज़िम्मेदारियों से वो गहरा घाव जो मिल गया!


अच्छी लग ही रही थी वो सावन की बारिश,

की ज़िम्मेदारियों का वो सूखा जो पड़ गया!


मेरे सपनों को रौंद के,ज़िम्मेदारियों का वो बोझ जो मिल गया! 

कई उज्जवल सपनों को मेरा कंधा जो मिल गया...!!!


कई उज्ज्वल सपनों को मेरा कंधा जो मिल गया | Kai Ujjwal Sapno Ko Mera Kandha Jo Mil Gaya | Priya Pandey Hindi Poem, Poetry, Quotes, कविता, Written by Priya Pandey Author and Hindi Content Writer. हिंदी कहानियां, हिंदी कविताएं, विचार, लेख



Achi Lag Hi Rahi Thi Vo Sawan Ki Baarish,

Ki Zimmedariyo Ka Vo Sukha Jo Pad Gaya !

Kai Ujjwal Sapno Ko Mera Kandha Jo Mil Gaya! 


Ab Uthana Hi Tha Uss Abodh Ko Chote Kandho Par,

Choti Si Zindagi Ko Mahnga Bojh Jo Mil Gaya!

Shareer Ko Ab Na Hi Hosh Hai Chote Se Zakhmon Ka,

Zimmedariyo Se Vo Gahra Ghav Jo Mil Gaya! 


Achai Lag Hi Rahi Thi Vo Sawan Ki Baarish,

Ki Zimmedariyo Ka Vo Sukha Jo Pad Gaya! 


Mere Sapno Ko Raund Ke, Zimmedariyo Ka Vo Bojh Jo Mil Gaya! 

Kai Ujjwal Sapno Ko Mera Kandha Jo Mil Gaya...!!!



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