हर एक शब्दों को तजुर्बे से ही पिरोया है,
हर एक पल में खुद को फ़ुरसत से संवारा है !

जीवन का था सख़्त बर्ताव तजुर्बे की ख़ातिर,
तजुर्बे ने खुद को बड़ा किया मेरे उम्र की ख़ातिर !

बुढ़ापे की दहलीज़ पे तजुर्बे का ही पहरा है,
तो कही बचपन की तकलीफ़ों से तजुर्बा गहरा है !

तजुर्बा ही उम्र से हमको बड़ा बनाता है,
तो कही उलझी सी ज़िंदगी को तजुर्बा सुलझाता है!

तजुर्बा है सबको हर सबक़ का बेहिसाब,
मुट्ठी भर मुसीबतें है तो कही मुश्किलें बेहिसाब !

तजुर्बे की साँझ से उम्र ढलती रही,
तजुर्बा एक ही है जो मैं सादगी से कहती रही ....!!!

तजुर्बा | Hindi Poetry Written By Priya Pandey Hindi Poem, Poetry, Quotes, कविता, Written by Priya Pandey Author and Hindi Content Writer. हिंदी कहानियां, हिंदी कविताएं, विचार, लेख

Har Ek Shabdo Ko Tajurbe Se Hi Piroya Hai,
Har Ek Pal Mein Khud Ko Fursat Se Sanwara Hai ! 

Jeevan Ka Tha Sakht Bartaav Tajurbe Ki Khaatir,
Tajurbe Ne Khud Ko Bada Kiya Mere Umar Ki Khatir ! 

Budhape Ki Dahaleez Pe Tajurbe Ka Hi Pehra Hai,
To Kahi Bachapan Ki Takalifon Se Tajurba Gehra Hai ! 

Tajurba Hi Umar Se Hamko Bada Banata Hai,
To Kahi Ulajhi Si Zindagi Ko Tajurba Suljhata Hai ! 

Tajurba Hai Sabko Har Sabaq Ka Behisaab ,
Mutthi Bhar Musibate Hai To Kahi Mushkile Behisaab ! 

Tajurbe Ki Saanjh Se Umar Dhalti Rahi,
Tajurba Ek Hi Hai Jo Main Sadagi Se Kehati Rahi ....!!!