संजो के रखती रही हर रिश्तों को जो Hindi Poem, Poetry, Quotes, कविता, Written by Priya Pandey Author and Hindi Content Writer. हिंदी कहानियां, हिंदी कविताएं, विचार, लेख.

संजो के रखती रही हर रिश्तों को जो ,

सुलझाती रही कही हर रिश्तों को !

उलझनो के भीतर भी पाती रही खुद को,

संजो के रखती रही हर रिश्तों को जो !!


चलती रही बस चलना ही मंज़ूर किया ,

खुद को घूटते रिश्तों से आज़ाद किया !

कही बेबाक़ अन्दाज़ को दर्शाया तो ,

कही बड़बोले पन से हँसाया भी सबको !!


मिलनसार सा व्यवहार रहा सभी के प्रति ,

सकारात्मक सा प्रभाव डालती रही सभी के प्रति !


परीस्थितयो को समझाना कुछ ऐसा है तेरा ,

जैसे उन सभी से उभर कर आना है तेरा !


सिखाती भी रही समझाती भी रही ,

जैसे की तू साँझा कर रही हर जज़्बात को !


तू कोशिशों पर अमल कर यही तेरे जीवन का अर्थ हो जाए !

उन रास्तों पर ना जाए जो तेरे अहम से परे हो जाए !!


ना ही भटके ना कभी हो भयभीत तू ,

अपनी मंज़िलो को पाने में !

आसान बना खुद अपनी ही राहों को बस तू ,

ऐसे ही संजो कर रखती रहे हर रिश्तों और जज़्बातों को .....!!!